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समस्तीपुर में बिजली चोरी का बड़ा खुलासा: आइस फैक्ट्री में मीटर बायपास कर उड़ाई जा रही थी बिजली, NBPDCL को ₹42.86 लाख का नुकसान

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समस्तीपुर के पूसा क्षेत्र में NBPDCL और STF की संयुक्त छापेमारी में एक आइस फैक्ट्री में बिजली चोरी का बड़ा मामला पकड़ा गया। मीटर बायपास कर बिजली उपयोग करने से ₹42.86 लाख की राजस्व क्षति का खुलासा हुआ।

समस्तीपुर/आलम की खबर:बिहार में बिजली चोरी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच समस्तीपुर जिले से एक बड़ा मामला सामने आया है। उत्तर बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (NBPDCL) और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की संयुक्त कार्रवाई में पूसा क्षेत्र स्थित एक आइस फैक्ट्री में बड़े पैमाने पर बिजली चोरी का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया कि फैक्ट्री संचालक द्वारा मीटर को बायपास कर औद्योगिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं, जिससे बिजली विभाग को लाखों रुपये की राजस्व क्षति पहुंची।

यह कार्रवाई गुरुवार सुबह विशेष तकनीकी निगरानी और डिजिटल सर्विलांस के आधार पर की गई। बिजली विभाग के अधिकारियों को लंबे समय से इस औद्योगिक इकाई की बिजली खपत को लेकर संदेह था। विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज खपत और वास्तविक उत्पादन क्षमता के बीच भारी अंतर दिखाई दे रहा था। इसी आधार पर विस्तृत तकनीकी जांच शुरू की गई और बाद में संयुक्त छापेमारी दल का गठन किया गया।

सूत्रों के अनुसार मुख्यालय स्तर पर डिजिटल मॉनिटरिंग के दौरान पाया गया कि संबंधित आइस फैक्ट्री की बिजली खपत सामान्य औद्योगिक मानकों की तुलना में असामान्य रूप से कम दर्ज हो रही थी। जबकि फैक्ट्री का उत्पादन और संचालन नियमित रूप से जारी था। इससे अधिकारियों को आशंका हुई कि कहीं न कहीं मीटरिंग सिस्टम के साथ छेड़छाड़ की जा रही है।

जांच को गंभीरता से लेते हुए STF मुख्यालय, समस्तीपुर विद्युत आपूर्ति प्रमंडल तथा पूसा क्षेत्र के विद्युत अधिकारियों की एक संयुक्त टीम गठित की गई। टीम ने सुबह करीब पांच बजे औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान फैक्ट्री पूरी तरह चालू अवस्था में पाई गई, लेकिन मीटर से मिलने वाला डेटा वास्तविक संचालन से मेल नहीं खा रहा था।

अधिकारियों ने जब तकनीकी जांच की तो पता चला कि मीटर के इनपुट और आउटपुट सिस्टम में अवैध हस्तक्षेप किया गया है। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि विद्युत मीटर को प्रभावहीन बनाकर औद्योगिक लोड सीधे लाइन से संचालित किया जा रहा था। इस व्यवस्था के कारण फैक्ट्री में बड़ी मात्रा में बिजली का उपयोग होने के बावजूद मीटर में खपत लगभग नगण्य दर्ज हो रही थी।

छापेमारी के दौरान फैक्ट्री परिसर का कुल विद्युत भार लगभग 80 केवीए आंका गया। विभागीय गणना और तकनीकी मूल्यांकन के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि इस अवैध कनेक्शन और मीटर बायपास व्यवस्था के कारण बिजली विभाग को लगभग 42 लाख 85 हजार 775 रुपये की राजस्व हानि हुई है।

बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह हाल के समय में जिले में पकड़े गए बिजली चोरी के बड़े मामलों में से एक है। औद्योगिक इकाइयों द्वारा इस प्रकार की चोरी न केवल विभाग को आर्थिक नुकसान पहुंचाती है बल्कि बिजली वितरण प्रणाली पर भी अतिरिक्त दबाव डालती है। इसका असर आम उपभोक्ताओं तक पर पड़ता है।

छापेमारी के दौरान मौके से कई तकनीकी साक्ष्य भी एकत्र किए गए हैं। जांच दल ने विद्युत नेटवर्क, मीटरिंग सिस्टम और परिसर में लगे उपकरणों की विस्तृत जांच की। सभी दस्तावेजों और तकनीकी रिपोर्ट को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए सुरक्षित रखा गया है।

NBPDCL ने संबंधित उपभोक्ता के खिलाफ भारतीय विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 135 सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है। विभाग की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। मामले में आगे और भी कई खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

बिजली विभाग ने स्पष्ट किया है कि आधुनिक तकनीक और डिजिटल सर्विलांस के जरिए बिजली चोरी करने वालों की पहचान लगातार की जा रही है। विभाग अब केवल शिकायतों पर निर्भर नहीं है बल्कि डेटा एनालिसिस और तकनीकी मॉनिटरिंग के माध्यम से संदिग्ध उपभोक्ताओं पर नजर रख रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिजली चोरी केवल आर्थिक अपराध नहीं है बल्कि यह पूरे ऊर्जा तंत्र को प्रभावित करने वाला गंभीर मामला है। इससे विभाग की आय प्रभावित होती है और ईमानदारी से बिल भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं पर अप्रत्यक्ष बोझ बढ़ता है।

फिलहाल इस कार्रवाई के बाद जिले के अन्य औद्योगिक उपभोक्ताओं में भी हड़कंप मचा हुआ है। बिजली विभाग ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में इसी तरह की और भी विशेष छापेमारी की जाएगी। ऐसे में कई अन्य औद्योगिक इकाइयां भी जांच के दायरे में आ सकती हैं।

समस्तीपुर में सामने आया यह मामला बताता है कि तकनीक के इस दौर में भी कुछ लोग सरकारी व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के लिए नए-नए तरीके अपनाते हैं। बिजली चोरी केवल राजस्व की हानि नहीं बल्कि विकास और ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा हमला है।

जब कोई औद्योगिक इकाई लाखों रुपये की बिजली चोरी करती है, तो उसका असर पूरे वितरण तंत्र पर पड़ता है। इससे बिजली कंपनियों को नुकसान होता है और अंततः इसका बोझ आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है।

NBPDCL द्वारा डिजिटल सर्विलांस और तकनीकी विश्लेषण के माध्यम से ऐसे मामलों का खुलासा करना एक सकारात्मक कदम है। इससे स्पष्ट संदेश जाता है कि अब बिजली चोरी को छिपाना आसान नहीं होगा। जरूरत इस बात की है कि ऐसे मामलों में त्वरित कानूनी कार्रवाई हो ताकि दूसरों के लिए भी यह एक सबक बन सके।

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